क्या आप बेरोज़गार है।

बेरोज़गारी

क्या आप भी उन बेरोज़गारों में शामिल है जो एक अच्छा हुनर होने के बावजूद अच्छी तो छोड़िये कोई काम चलाऊ नोकरी की तलाश अब तक कर रहे है ।
तो फिर आपके मन मे ये सवाल हमेशा आता होगा के क्या मैं ही हु जो इस तरह की परेशानी को देख रहा हु या फिर और कोई भी इस प्रक्रिया में शामिल है तो चलिए आपकी इस गलतफहमी को हम दूर कर देते है। और आप भी जानिए के3 आखिर सरकार हमारी बेरोज़गारी दूर करने के लिए कुछ कर भी रही है या नही और अगर कुछ कर भी रही है तो उसका असर आप तक पहुच पाया भी है या नही।
जब सबसे पहले इस पहले तो आपको बता दे के आप अकेले नही है जो बेरोज़गारी के समस्या से झूझ रहे है।आपकी तरह या यूं कहें के आपके साथ 31 मिलियन युवा इस लाइन में आप ही कि तरह जीवन यापन करने के लिए संघर्ष कर रहे है।जोकि बेरोज़गारी की दर 6.1% दर्शाता है। जी हा Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE)की रिपोर्ट में ये संख्या फरवरी माह में मापी गयी थी जिसने बेरोज़गारी की दर को 6.1% अंकित किया था आपको ये जानकर और भी हैरानी हो सकती है के पिछले ही महीने यानी जनवरी में इसी संस्था ने बेरोज़गारी की दर को 5% मापा था।  अब अगर हम बात करते है उस वक़्त की भाजपा सरकार सत्ता में ही काबिज़ नही थी तो उस वक़्त की बेरोज़गारी की दर 2.3% मापी गयी थी हालांकि ये भी एक चिंता का विषय था क्योंकि भारत जैसे विशाल देश मे 1 % बेरोज़गारी का मतलब भी लगभग 13200000 लोगो से निकलता है इस आप समझ सकते है कि .1% बेरोज़गारी की उठा गिरी से हमारे देश के विकास पर क्या फर्क सकता है फिर अगर बात अब के आकड़ो की करे तो जो नज़र आता है वो ज़ाहिर है हकीक़त से परे नही है। हद तो तब हो जाती है जब इनमे ज़्यादातर बेरोज़गार युवा ऐसे निकलते है जिनके पास न सिर्फ अच्छी तालीम है बल्कि एक डिग्री के भी मालिक है।
भारत में बेरोजगारी एक सामाजिक मुद्दा है और भारत में बेरोजगारी के रिकॉर्ड भारत के श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा रखे जाते हैं।


श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 2015-16 में राष्ट्रीय बेरोजगारी में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। हालांकि, डेटा सामान्य प्रिंसिपल सहायक स्थिति (यूपीएसएस) दृष्टिकोण पर आधारित है जिसके लिए नियोजित व्यक्ति को कॉल करने के लिए एक वर्ष में केवल 30 दिनों का काम करना आवश्यक है। परिवारों के सत्तर-सात प्रतिशत लोगों के पास नियमित वेतन मजदूरी नहीं है और 67 प्रतिशत से अधिक आय प्रति माह ₹ 11,000 से कम है। लगभग 58 प्रतिशत बेरोजगार स्नातक और 62 प्रतिशत बेरोजगार स्नातकोत्तर ने बेरोजगारी के मुख्य कारण के रूप में शिक्षा / कौशल और अनुभव के साथ मेल खाने वाली नौकरियों की अनुपलब्धता का हवाला दिया। राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन दस्तावेज के अनुसार, भारत में 9 7 प्रतिशत श्रमिकों ने औपचारिक कौशल प्रशिक्षण नहीं लिया है। लगभग 76 प्रतिशत परिवारों को रोजगार पैदा करने वाली योजनाओं जैसे मनरेगा, पीएमईजीपी, एसजीएसवाई, एसजेएसआरई आदि से लाभ नहीं हुआ।
इस रिपोर्ट से साफ तौर से ये ज़ाहिर हो जाता है के सरकार ययुवाओ को रोज़गार देने में औंधे मुंह गिरी है।
इतना ही नही अगर सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ती रही तो जाहिर तौर पर यके कहा जा सकता है के इस सरकार से सत्ता संभाली ही नही आई ।
आज जब न्यूज़ चैनल को लगाया जाता हक तो उस पर सिर्फ बलात्कार ,हत्या ,और अंत मे सिर्फ धर्म के ऊपर ही चर्चाये मिलती है ।किसी को नही खबर के रोज़गार कितना गिरा कितना नुकसान हुआ कितना फायदा हुआ ।क्या हमारे बगल में जो इंसान है उसके घर कुछ ऐसा तो नही हुआ के आज उसे ऑयली पेट सोना पड़े।
न्यूज़ चेंनल को अपनी टी आर पी से मतलब है नेताओ को अपने वोट से लेकिन जो हाल इस देश के युवा का होते जा रहा है उसके लिए शायद अभी और भी कुछ बाकी है।
शायद वो इंतेज़ार कर रहे है अपनी बारी का।शायद वो इंतेज़ार कर रहे है अपने सुखो के खत्म हो जाने का।
जब मोदी जी से इस बारे में पूछा जाता है तो बड़ी सफाई से वो पकोड़े टालने की सलाह युवाओ को देते हुए निकल जाते है।जैसे मानो सवाल ही गलत पूछ लिया गया हो। अभी तक हमारे देश की इकॉनमी को जो नुकसान हुआ है उसकी सबसे बड़ी वजह नेरोज़गारी को बया जा रहा है। लेकिन आज की राजनीति को धर्म से फुरसत ही कहा के कुछ विकास जैसे मुद्दों पर बात करे ।





















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